फिल्म हनुमान अंश के गायक सुनील कुमार लोधी ने अपनी सुरीली आवाज में ” मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डार दई” गाना गाकर पूरे देश में तहलका मचा दिया है,और सभी लोगों के दिलों में जगह बना ली है। इस गाना को सुनकर उन्हें फिल्म इंडस्ट्री से भी कई ऑफर आने लगे।
मध्यप्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भी उन्हें अपने मुख्यमंत्री निवास पर बुलाकर इस गाने को सुना। और सुन कर के उन्हें ₹ 50 लाख का अनुदान दिया, जैसा की सुनील लोधी बचपन से ही दृष्टिहीन है तो मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनके इलाज का भी ऐलान किया है। कहा कि आज से आप की इलाज की जिम्मेदारी सरकार की है।
लोकप्रियता और प्रशंसको का प्यार
सुनील लोधी के प्रशंसकों ने फिल्म हनुमान अंश को देखने के लिए पूरा थिएटर ही बुक करवा लिया जिससे कि सुनील और उनका पूरा परिवार आसानी से फिल्म का आनंद ले सकें। इसी कड़ी में उनके एक प्रशंसक ने उन्हें उनके गाना को सुनकर एक पल्सर बाइक भी गिफ्ट दे दी है।
फिल्मो से ऑफर और स्टेज शो
सुनील लोधी का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। इस गाने की सफलता से उन्हें फिल्मी दुनिया से कई ऑफर आने लगे हैं ,
गणेश चतुर्थी और नवरात्रि के एडवांस में लाइव परफॉर्मेंस के लिए आर्डर बुक हो चुके हैं।
फिल्म हनुमान अंशु ने पहले 1 सप्ताह में कुछ भी व्यापार नहीं किया है लेकिन उस के बाद धीरे-धीरे फिल्म चल पड़ी, फिल्मी पंडितों का कहना है कि यह फिल्म 100 करोड़ की सफलता को छुयेगी, जबकि इस फिल्म की लागत ₹2 करोड़ बताई जा रही है
नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म
इस फिल्म में नीम करोली बाबा के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं को सम्मिलित करके इस फिल्म को बनाया गया है। उनके बचपन से लेकर और समाधि तक की सभी घटनाओं को इस फिल्म में बताया गया है। सबसे प्रमुख घटना नीम करोली बाबा की रेल गाड़ी वाली बताई गई है जिसमें एक अंग्रेज अफसर द्वारा उन्हें रेल से उतार दिया जाता है और वह नीचे उतर जाते हैं। उसके पश्चात रेलगाड़ी 2 दिन तक वहीं खड़ी रहती है और एक इंच भी आगे या पीछे नहीं होती है, उसके पश्चात रेलवे के कुछ बड़े अधिकारी आते हैं और उनसे माफी मांगते हैं। उसके पश्चात रेलगाड़ी चल पाती है।
विदेश के भी नीम करोली बाबा के कई शिष्य बने हुए हैं। उन घटनाओं का भी जिक्र इस फिल्म में किया गया है।
एक और घटना है कि एक गरीब माता-पिता का बेटा बॉर्डर पर सेना में तैनात था और युद्ध में लड़ रहा था तो उसकी रक्षा के लिए नीम करोली बाबा ने स्वयं उसकी गोलियों को खा लिया और जब एक महीने बाद वह वापस घर आया तो उसने बताया, घटना को देखने के लिए आप इस फिल्म हनुमान अंश को एक बार अवश्य देखें।
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